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हाइड्रोजन बम का आविष्कार किसने किया था, और कब हुआ?

हाइड्रोजन बम का आविष्कार किसने किया था, और कब हुआ?


क्या आप जानते हैं कि हाइड्रोजन बम का आविष्कार किसने किया था? और कब किया था? अगर नहीं जानते तो आइये आज जानते हैं, हाइड्रोजन बम का आविष्कार किसने किया था और कब हुआ।


Who invented the hydrogen bomb


हाइड्रोजन बम को थर्मोन्यूक्लियर भी कहा जाता है। अगर दुनिया के सबसे विनाशकारी हथियार की बात करें तो पहले स्थान पर थर्मोन्यूक्लियर यानी हाइड्रोजन बम ही आता है हालाकि अभी तक इसका इस्तेमाल नहीं किया गया है। लेकिन इसके परीक्षण साबित कर चुके हैं कि यह कुछ मिनटों में ही मानव सभ्यता और पृथ्वी के तमाम जीव जंतुओं के अस्तित्व को खतरे में डाल सकता है।


ऐसा इसलिए है क्योंकि हाइड्रोजन बम परमाणु बम से 1000 गुना ज्यादा शक्तिशाली है। परमाणु की शक्ति हम देख चुके हैं जब अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के दो शहरों में परमाणु बम गिराए थे तब दोनों शहर पूरी तरह से तबाह हो गए थे।



हाइड्रोजन बम का आविष्कार किसने किया था?

आपकी जानकारी के लिए बता दे विश्व के पहले हाइड्रोजन बम का आविष्कार हंगेरियन मूल के अमेरिकी भौतिक वैज्ञानिक Edward Teller ने किया था। इन्ही के नेतृत्व में 1 नवंबर, 1952 में प्रशान्त महासागर में स्थित प्रवाल द्वीप समूह Enewetak के एक द्वीप पर इस बम का प्रथम परीक्षण किया गया था तथा इस परीक्षण का नाम Ivy Mike रखा गया था। इस तरह हाइड्रोजन बम का आविष्कार करने वाला अमेरिका पहला देश बन गया था।


हंगरी देश में साल 1908 में जन्मे एडवर्ड टेलर ने अपने विश्वविद्यालय स्तर की पढ़ाई जर्मनी में की थी। इसके बाद वह साल 1935 में अमेरिका आ गए एडवर्ड के अमेरिका आने और रक्षा शोध और अनुसंधान से जुड़ने का प्रमुख कारण हंगरी देश में हुए कम्युनिस्ट आंदोलन और जर्मनी में हिटलर की नाजी सेना का उदय होना था। क्योंकि उस समय हिटलर की सेना यूरोप के देशों में एक के बाद एक कब्जा कर रही थी। जिससे एडवर्ड भी काफी प्रभावित थे। ऐसे में हिटलर की सेना को रोकने के लिए एडवर्ड परमाणु बम जैसे खतरनाक हथियार विकसित करने के समर्थक बन गए थे।


जब अमेरिका के बाद सोवियत संघ ने अपना पहला परमाणु बम का परीक्षण कर लिया तो एडवर्ड ने अमेरिका के राष्ट्रपति को हाइड्रोजन बम परियोजना पर काम करने के लिए मनाया क्योंकि उस समय अमेरिका और सोवियत संघ (आज का रूस) एक दूसरे कड़े प्रतिद्विंदी माने जाते थे। राष्ट्रपति से स्वीकृति मिलने के बाद साल 1952 में दुनिया के पहले हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया गया।


हाइड्रोजन बम का अविष्कार कब किया गया था?

हाइड्रोजन बम का पहली बार परीक्षण 1 नवंबर, 1952 में अमेरिका के द्वारा किया गया और इस तरह हाइड्रोजन बम का आविष्कार हुआ?



हाइड्रोजन बम क्या है?

हाइड्रोजन बम परमाणु बम की एक किस्म है जिसमें Deuterium और Tritium का इस्तेमाल किया जाता है। इस बम में तीन चरण में धमाके होते हैं जो मुख्य रिएक्टर को फटने में मदद करता है। इस मुख्य रिएक्टर के फटने के लिए 5 लाख डिग्री सेल्सियस या इससे भी अधिक गर्मी की जरूरत पड़ती है जो पहले दो धमाके से मिलती है। जब हाइड्रोजन बम पूरी तरह से विस्फोट करता है तो इसकी ऊर्जा सूर्य के तापमान के बराबर होती है।


इसके धमाके में इतनी ताकत होती है कि इसकी हवा ही किसी भी इंसान को कई किलोमीटर तक फेंक सकती है। अगर कोई भी व्यक्ति इसकी रोशनी को देख ले तो वह अंधा भी हो सकता है जिस द्वीप में अमेरिका ने इस बम का परीक्षण किया था उस द्वीप और आसपास के पूरे क्षेत्र में सभी प्रकार के जीवन समाप्त हो गया था।



वर्तमान में हाइड्रोजन बम कौन कौन से देश के पास है?

वर्तमान में दुनिया के 9 देश सफलतापूर्वक थर्मोन्यूक्लियर (हाइड्रोजन बम) बमों का परीक्षण कर चुके हैं। अधिकारिक तौर पर निम्नलिखित देशों के पास हाइड्रोजन बम है ।


1.  संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) – अमेरिका विश्व का पहला ऐसा देश है जिसने 1952 में इस बम का पहला परीक्षण किया ।


2. रूस (Russia) – रूस दुनिया का दूसरा देश है जिसने 1954 में इस बम को बनाया था।


3. इंग्लैंड (United Kingdom) – यह दुनिया का तीसरा देश है जिसने अक्टूबर , 1957 में इस बम का परीक्षण गुप्त नाम – Operation Grapple से किया था।


4. चीन (China) – यह विश्व का चौथा देश है जिसने 1967 में इस बम का परीक्षण किया।


5. फ्रांस (France) – फ्रांस ने अगस्त, 1968 में इस बम का परीक्षण किया।


6. भारत (India) – भारत ने ‘ऑपरेशन शक्ति’ के तहत 1998 में इस बम का सफल परीक्षण किया।


7. इजराइल (israel) – इजराइल ने थर्मोन्यूक्लियर बम का प्रथम परीक्षण किस वर्ष किया था यह अभी तक साफ नहीं हो सका है।


8. पाकिस्तान (Pakistan) –  पाकिस्तान ने थर्मोन्यूक्लियर बम का प्रथम परीक्षण किस वर्ष किया था यह अभी तक साफ नहीं हो सका है।


9. उत्तर कोरिया (North Korea) – इस सूची में उत्तर कोरिया का नाम अभी दो वर्ष पूर्व में ही जोड़ा गया है। उत्तर कोरिया ने इस बम के लघु रूप का परीक्षण 6 जनवरी, 2016 को पूरा किया है।



हाइड्रोजन बम कैसे काम करता है? 

इस बम में इतनी विशाल मात्रा में ऊर्जा उसी प्रक्रिया से उत्पन्न होती है जिस प्रक्रिया से हमारा सूर्य भी अनंत ऊर्जा उत्सर्जित करता है यानी ‘नाभिकीय संलयन’। संलयन की इस प्रक्रिया में श्रृंखला अभिक्रिया (chain reaction) भी शामिल होती है। इस श्रृंखला अभिक्रिया में हाइड्रोजन के दो समस्थानिक – ड्यूटेरियम तथा ट्रिटियम अत्यंत उच्च ताप पर संघटित होकर हीलियम का निर्माण करते है। इस अभिक्रिया के लिए उच्च ताप नाभिकीय विखण्डन (fission) द्वारा उत्पन्न किया जाता है। श्रृंखला अभिक्रिया के कारण ही यह नाभिकीय हथियार इतनी विशाल मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न कर पाता है।



हाइड्रोजन बम में ईंधन के रूप में किस चीज का उपयोग किया जाता है?

हाइड्रोजन बम में थर्मोन्यूक्लियर ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के भारी समस्थानिक ड्यूटेरियम और ट्रिटियम का उपयोग किया जाता हैं।



हाइड्रोजन बम परमाणु बम से भिन्न कैसे है?


परमाणु विशेषज्ञों के अनुसार हाइड्रोजन बम परमाणु बम से 1000 गुना अधिक शक्तिशाली हो सकता है।


इन दोनों के बीच मुख्य अंतर ‘विस्फोट प्रक्रिया’ है।


H-बम और एटम बम से ऊर्जा उत्पन्न करने के तरीके में भिन्नता होती है। 


एक ओर जहां H-बम में संलयन की प्रक्रिया से दो हल्के परमाणु नाभीकों को संघटित करके एक भारी नाभिक का निर्माण किया जाता है, जिससे एटम बम की तुलना हजारों गुना अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है। वही दूसरी ओर एटम बम में भारी परमाणु नाभिकों का विखण्डन करके दो हल्के नाभिकों में विभाजित किया जाता है, जिसके कारण यह H-बम की तुलना में कई गुना कम उर्जा पैदा करता है और इसके विस्फोट का प्रभाव भी कम होता है।



Hydrogen bomb से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य 


■ H-Bomb एटम बम की तुलना में 100 से 1000 गुना तक अधिक शक्तिशाली हो सकता है।


■ एटम बम की विस्फोटक क्षमता (explosive yield) को मापने की इकाई ‘किलोटन’ है। जहां प्रत्येक किलोटन 1000 टन टीएमटी की विस्फोटक क्षमता के बराबर होता हैं। वही, हाइड्रोजन बम की विस्फोटक क्षमता ‘मेगाटन’ में मापा जाता है। जहां प्रत्येक मेगाटन 10 लाख टन टीएमटी के विस्फोटक क्षमता के बराबर होता हैं!


■ 1952 में जिस पहले H-बम का परीक्षण अमेरिका द्वारा किया गया था उसकी क्षमता जापान के हिरोशिमा पर गिराए गए एटम बम की तुलना में 1000 गुना अधिक थी तथा द्वितीय विश्व-युद्ध में प्रयोग हुए कुल बमों की विस्फोटक क्षमता से दो गुना अधिक थी।


■ वायुयान से हाइड्रोजन बम को 10,000 फीट की ऊंचाई से गिराकर पहला परीक्षण अमेरिका द्वारा 20 मई, 1956 को नामू द्वीप पर किया गया था, जिसकी विस्फोटक क्षमता 1.5 करोड़ टन टीएनटी के बराबर थी। इससे उत्पन्न हुए आग के गोले की चौड़ाई लगभग 6 किमी. थी तथा यह 500 सूर्यों से भी ज्यादा चमकीला था।


■ वर्ष 1980 तक पूरी दुनिया के देशों के आयुधशालाओं में लगभग 40,000 थर्मोन्यूक्लियर हथियारों और उपकरणों को संचित करके रखा गया था, जिनकी संख्या 1990 तक 10,000 से भी कम हो गई।



CONCLUSION


तो दोस्तों आज कि इस लेख में आपने जाना कि हाइड्रोजन बम का आविष्कार किसने किया था? और कब किया था? वैसे देखा जाए तो परमाणु बम का प्रयोग किया जा चुका है लेकिन हाइड्रोजन बम को अभी किसी भी देश पर हमले के लिए उपयोग नहीं किया गया है। और उम्मीद करते हैं इसका उपयोग कभी न हो क्योंकि हम परमाणु बम की तबाही देख चुके हैं। जिसने जापान के दोनों शहर को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था। चूँकि हाइड्रोजन बम परमाणु बम से 1000 गुना ताकतवर है ऐसे में इसके प्रयोग से मानव जाति के साथ तमाम जीवन खतरे में आ सकता है।



People also ask


परमाणु बम का आविष्कार किसने किया था?

परमाणु बम का आविष्कार अमेरिकी मूल के वैज्ञानिक J. Robert Oppenheimer (रॉबर्ट ओपेनहाइमर) ने किया था।


हाइड्रोजन बम के खोजकर्ता कौन है?

हाइड्रोजन बम का आविष्कार हंगेरियन मूल के अमेरिकी सैद्धांतिक भौतिक वैज्ञानिक Edward Teller ने किया था।


दुनिया का सबसे खतरनाक बम कौन सा है?

ख़तरनाक बमों की लिस्ट में अमेरिका का बंकर बस्टर कहे जाने वाला MOP यानी Massive Ordnance Penetrator का नाम भी है। इसका आधिकारिक नाम GBU-57A है। इसकी लंबाई करीब 20 फुट और वज़न 14 हज़ार किलोग्राम है। इसे दुनिया सबसे बड़ा गैर परमाणु बम कहा जाता है जो 60 मीटर की गहराई तक धमाका कर सकता है।


भारत के पास हाइड्रोजन बम कितने हैं?

भारत में हाइड्रोजन बम (Hydrogen Bomb) को लेकर स्थिति स्प्ष्ट नहीं होने के कारण संख्या का निश्चित पता नहीं है। भारत ने हाइड्रोजन बम का परीक्षण 1998 में किया था।


भारत के पास कितने परमाणु बम है 2021?

भारत की बात करें तो साल 2020 में भारत के पास 150 परमाणु बम थे, जबकि 2021 में इनकी संख्या बढ़कर 156 हो गई। भारत ने पिछले साल छह नए परमाणु हथियार बनाए और अब उसके पास करीब 156 परमाणु हथियार हो गए हैं।



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