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खुद का बिज़नेस शुरू करने से पहले ध्यान रखने वाली कुछ बातें

खुद का बिज़नेस शुरू करने से पहले ध्यान रखने वाली कुछ बातें

अपना खुद का बिज़नेस शुरू करने से पहले इन बातों का ध्यान जरूर रखें

Things you must do before starting a business in Hindi

कोई भी व्यक्ति जब यह मन बना लेता हैं, कि उसे अब व्यापार करना है, तो उसके साथ ही उसके मन में सबसे पहले यह सवाल उठता हैं, कि एक व्यवसाय को शुरू करने से पहले उसे क्या – क्या करना होगा, किस तरह से वह व्यवसाय शुरू कर सकता हैं, किन – किन चीजों की आवश्यकता होगी आदि इसी तरह के सवाल उसके मन में अक्सर उठते रहते हैं. तो यदि आप भी उन्हीं व्यक्तियों में से एक हैं, तो आपको इसकी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, हम इस आर्टिकल की माध्यम से आपको यह बतायेंगे, की आप एक व्यवसाय को जब शुरू करने जायेंगे तो उससे पहले आपको क्या करना होगा|

खुद का बिज़नेस शुरू करने से पहले ध्यान रखने वाली कुछ बातें

एक व्यवसाय शुरू करने से पहले करने वाली कुछ चीजें

बिजनेस की शुरुआत करने और उसे सफलतापूर्वक बरकरार रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए। आइए उसी के बारे में जानते हैं बिजनेस की शुरुआत करना, चाहे वह छोटा हो या बड़ा आसान काम नहीं है। इसमें पैसे के साथ-साथ समय और उर्जा की भरपूर खपत होती है। अगर आपने अपने बिजनेस की शुरुआत कर दी है तो यह आपके लिए एक सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। लेकिन उस बिजनेस को बरकरार रख पाना एक बहुत ही बड़ी चुनौती है, जिसका सामना बहुत ही कम लोग कर पाते हैं। अब सवाल यह उठता है कि बिजनेस की शुरुआत करने और उसे सफलतापूर्वक बरकरार रखने के लिए हमें क्या करना चाहिए। आइए उसी के बारे में जानते हैं -


व्यवसाय का नेचर (Type of Business) :-

सबसे पहले आपको यह निश्चिय करना होगा, कि आप क्या एवं किस तरह का व्यवसाय करने के बारे में सोच रहे हैं. एवं आप अपने व्यवसाय में क्या बेचने जा रहे हैं. इसके लिए आपके पास 3 विकल्प दिए हुए होंगे सर्विस, मर्चेंडाइजिंग या फिर मैन्युफैक्चरिंग. आपको अपने व्यवसाय को शुरू करने के लिए इनमें से किसी एक केटेगरी का चुनाव करना होगा.


सर्विस (Service) :-

इसमें आप अपना समय एवं विशेषज्ञता बेचते हैं, जैसे कि पेशेवर इवेंट आर्गेनाइजर, आईटी, मार्केटिंग आदि के काम होते हैं, या रेस्तौरेंट, भोजन, कियोस्क, ट्रांसपोर्टेशन, सैलून, स्पा आदि भी हो सकते हैं.


मर्चेंडाइजिंग (Merchandising) :-

इसमें आप एक रिटेल, होलसेल, ट्रेडिंग या डिस्ट्रीब्यूशन जैसे व्यवसाय चुन सकते हैं. जिसमें वस्तुओं या सामानों को बेचा और खरीदा जाता हैं. उदाहरण के लिए ग्रोसरी और डिपार्टमेंट स्टोर्स, रेटल आउटलेट्स, ऑनलाइन रिसेलर्स आदि.


मैन्युफैक्चरिंग (Manufacturing) :-

यह कच्चा माल और कर्मचारियों दोनों के साथ मिलकर कुछ उपकरण का उपयोग करके इसे फिर बेचने योग्य उत्पाद बनाये जाने वाले व्यवसाय होते हैं. उदाहरण के लिए कार, गैजेट्स, क्लोथिंग, बैग्स और डेली एसेंशियल आदि.


टारगेट कस्टमर (Target Customer) :-

अब आपके पास देने के लिए प्रोडक्ट या सर्विस हैं, जिसकी मदद से आपको लाभ प्राप्त हो सकता हैं. उसमें जब तक आपके पास ग्राहक नहीं होंगे, वे आपके प्रोडक्ट्स या सर्विस को नहीं खरीदेंगे एवं उसका उपयोग नहीं करेंगे, तब तक यह संभव नहीं है. यदि आप एक तरह का व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो आपको उसे बेचने से पहले ये पता होना चाहिए, कि आप क्या बेच रहे हो. यदि इसका बाजार अच्छा है, तो इसके बारे में स्टडी करें. इसके साथ ही यह भी याद रखें, कि एक प्रोडक्ट या सर्विस सभी के लिए एक प्रोडक्ट और सर्विस होती है. 


लोकेशन (Location):-

कई सारे व्यवसाय के इवेंट्स में यह सलाह दी जाती थी, कि आपके व्यवसाय के लिए सबसे जरुरी चीज है स्थान. इसलिए आप भी अपने व्यवसाय के लिए सबसे अच्छी जगह को पहचाने और देखें. यह आपके लक्षित ग्राहकों की संख्या को बढ़ाता हैं और आस-पास के लोग भी इसमें उनका साथ देते हैं. 


लीज, मरम्मत और सुधार :-

यदि आप किराये पर जगह लेते हैं, तो उसके लिये आपको किराया देना होता हैं. इसके लिए जोकि उस जगह के मालिक होते हैं, उन्हें आपको एडवांस रेंट और सुरक्षा जमा करने की आवश्यकता होती है. यह मासिक आधार पर 3 से 6 महीने में बराबर हो सकती है. इसके साथ ही जब आप रेंट पर कोई जगह लेते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं होता हैं, कि आपको सब कुछ आपके हिसाब से मिला है, आपको उस जगह को अपने अनुसार बनाने में खर्च करना होगा. क्योकि आम तौर पर जो किराये की जगह होती हैं, उसमें कुछ मरम्मत एवं उसमें कुछ सुधार करना पड़ता है. यदि आपको भी इस तरह के जगह की जरुरत है, तो आप अपने व्यवसाय की लागत में इसे ऐड करें, तो बेहतर होगा.


फार्मेशन :-

एक बार आपने यह निश्चय कर लिया कि आपको क्या बेचना हैं किसे बेचना हैं और कहाँ बेचना हैं तो इसके बाद बारी आती हैं कि आप उस व्यवसाय को कैसे करेंगे. इसके लिए आप पूर्ण स्वामित्व, पार्टनरशिप या कारपोरेशन में से एक का चुनाव कर सकते हैं.


पूर्ण स्वामित्व :-

इसका मतलब यह होता हैं कि आपका जो व्यवसाय होगा उसके मालिक केवल आप ही होंगे.


पार्टनरशिप :-

इसमें आप अपने व्यवसाय को किसी और व्यक्ति के साथ साझा करते हैं, जोकि आपका पार्टनर हो सकता है. इसके लिए आपको कम से कम 2 व्यक्तियों की आवश्यकता होगी.


कारपोरेशन :-

इसमें भी आप अपने व्यवसाय को किसी और व्यक्ति के साथ साझा करते हैं जोकि एक स्टॉकहोल्डर होगा. कारपोरेशन के लिए आपको कम से कम 5 लोगों की आवश्यकता होती हैं.


कैपिटल (Capital investment) :-

कैपिटल वह पूँजी या वैल्यू होती है, जोकि आपके व्यवसाय को शुरू करने और उसे चलाने में लगाई जाती है. यह नगद या नॉन – कैश दोनों में से कोई भी हो सकती है. यह जानने के लिए कि आपको कितने कैपिटल की आवश्यकता है इसके लिए आप पहले एक सूची तैयार करें कि आपको एक व्यवसाय को शुरू करने एवं चलाने के लिए किस – किस चीज में पैसे को खर्च करना होगा. इस सूची में एसेट्स को खरीदना, मरम्मत, लीज पेमेंट इसके साथ ही व्यवसाय के संचालन के लिए कुछ अन्य खर्च आदि भी शामिल हो सकते है.   


प्रॉपर बीमा प्राप्त करें :-

किसी भी व्यवसाय को करने के लिए बीमा भी बहुत आवश्यक होता है. इसलिए आप अपने व्यवसाय के लिए बीमा आवश्यक प्राप्त कर लें. ताकि आपको बाद में परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा.


एसेट की आवश्यकता :-

एक व्यवसाय को शुरू करने के लिए ऐसे एसेट्स की योजना बनाएं जिसकी आवश्यकता आपको व्यवसाय को चलाने में पड़ेगी. इसके लिए कुछ उदाहरण कंप्यूटर, उपकरण, फर्नीचर, वाहन आदि हो सकते हैं इसके लिए आप केवल उत्पाद ही नहीं बल्कि यह भी निर्धारित करें कि आपको वह कितना चाहिए हैं एवं उसकी कीमत क्या होगी.


सप्लायर्स :-

कुछ पहचाने गए पोटेंशियल सप्लायर्स को आपके द्वारा बेचे जाने वाले सेवा या माल के उत्पादन करने की आवश्यकता होगी. आप उसकी कीमत, लोकेशन, रिलायबिलिटी और संचालन के समय आदि पर भी विचार करें.


व्यवसाय के संचालन में होने वाला खर्च :-

आपको उस सभी की पहले से एक सूची बना लेना आवश्यक है जिसमें आपको अपना व्यवसाय चलाने के लिए खर्चा करना होगा. इसमें आमतौर पर सैलरी, किराया, ऑफिस सप्लाइज एवं यूटिलिटी आदि हो सकते हैं. आपने व्यवसाय की मासिक लागत पर भी विचार करें. यह आपकी कैपिटल आवश्यकताओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण चरण है. क्योकि आमतौर पर आपको कम से कम 6 महीने या 1 साल पूँजी के रूप में मासिक खर्च रखना होगा.


व्यक्ति या आउटसोर्स को हायर करना :-

व्यवसाय के मालिक के लिए सबसे कठिन कामों में से एक व्यक्तियों का मैनेजमेंट करना होता है. इसलिए आउटसोर्सिंग की मांग होती है. जब आप व्यवसाय को शुरू करते हैं तो आप इस विकल्प पर अवश्य विचार कर सकते है. यदि आप व्यक्तियों को हायर करने का विचार करते हैं तो आपको उनकी सैलरी और अन्य सरकारी नियमों पर विचार करना होगा, और यदि आप कंपनी के आउटसोर्स पर विचार करते हैं, या विशेषज्ञता और रिलाएबिलिटी पर विचार करते हैं तो आपका आउटसोर्स होगा.   


रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस एवं टैक्स आइडेंटिफिकेशन :- 

आपने अपने खर्च एवं कैपिटल की आवश्कताओं की पूँजी पर विचार कर लिया तो उसके बाद आपको अपने व्यवसाय को शुरू करने से पहले अपने व्यवसाय के नाम, निगमन, कागजती कार्यवाही दाखिल करने और स्थानीय नगरपालिका के साथ आवश्यक लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन और टैक्स की जानकारी प्राप्त करने जैसी विभिन्न चीजों की आवश्यकता होगी. इसके लिए कई सारे संसाधन दिए हुए हैं. फ़ेडरल टैक्स मामलों के लिए इंटरनल रिवेन्यू सर्विस (आईआरएस) है इसके अलावा स्थानीय कारपोरेशन कमीशन, देश में प्रत्येक स्थान के लिए रेगुलेटरी आवश्यकताओं को पूरा करने में किसी भी नए व्यवसाय के स्वामी की सहायता कर सकते हैं.


व्यवसाय के लिए एक बैंक खाता :-

आपको अपने व्यवसाय के लिए एक अलग से बैंक खाता खोलना होगा. इससे आपको अपने रिकॉर्ड रखने को आसान बनाने में मदद मिलेगी. और विशेष रूप से यदि आपका व्यवसाय एकल स्वामित्व वाला है तो आपको अपने व्यक्तिगत चीजों को अपने व्यवसाय में मिलाना भी नही होगा. आप ऐसे बैंक का चयन करें जोकि सुलभ और उपलब्ध हो. 


मार्केटिंग एवं प्रतिस्पर्धा :-

आपका व्यवसाय मार्केटिंग के बिना अधूरा है. क्योकि मार्केटिंग उन की – फैक्टर्स में से एक हैं जोकि यह दर्शाता है कि आपका व्यवसाय सफल क्यों हुआ और असफल क्यों है. अतः आप अपने व्यवसाय के लिए सही मार्केटिंग प्लेटफार्म का चयन करें. इसके अलावा थोड़ी प्रतिस्पर्धा होने में कुछ गलत नहीं है. क्योंकि इसी के आधार पर आपको बेहतर उत्पाद या सेवा के साथ बाहर आने का अवसर मिलता है. आपको अपने ग्राहकों को कैसे जीतना है इसके लिए प्रतिस्पर्धा एक महत्वपूर्ण कदम है. आपको अपने प्रतिस्पर्धी एवं उसके व्यवसाय के बारे में सब कुछ पता होना चाहिये. यदि आपको जानकारी नहीं होगी कि आपका प्रतिस्पर्धी किस तरह से आगे बढ़ रहा हैं आपको सफलता नहीं मिल पायेगी. अतः यह जरुरी है कि आप अपने बाजार को जानें, प्रतिस्पर्धा को जानें, और यह भी जानें कि आपकी कंपनी किस तरह से उनसे अलग हो सकती है.  


सरकारी अनुपालन :-

इसके बाद एक जरुरी चीज जोकि अक्सर छूट जाती है, वह है हर महीने, 3 महीने एवं साल में   सरकार को रिपोर्ट देना. अक्सर देखा जाता हैं कि बहुत से व्यवसाय जोकि काफी अधिक सफल हो रहे होते हैं लेकिन यदि वे सरकारी अनुपालन नहीं करते हैं तो बाद में उन्हें कुछ सरकारी जुर्माना जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सरकारी अनुपालन में कम से कम फाइलिंग, टैक्स का भुगतान और एसएसएस / फिलहेल्थ / पेज – आईबिग योगदान आदि चीजें आती है.


अकाउंटिंग एवं फाइनेंसियल एनालिसिस :-

जब आप अपना व्यवसाय शुरू करते हैं आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके पास रिलाएबल एकाउंटिंग और फाइनेंसियल रिपोर्टिंग प्रोसेस है. व्यवसाय को दूसरे शब्दों में एकाउंटिंग ही कह सकते है. इसलिए यह बहुत जरुरी होती है. यह पता होना चाहिए कि आपके व्यवसाय में क्या हो रहा है. इसके लिए आपके पास रिलाएबल एकाउंटिंग और फाइनेंसियल रिपोर्टिंग सिस्टम होना चाहिए.

तो इस तरह से आप सभी चीजों के बारे में पहले से जानकारी हासिल कर लें और उसके बाद अपने व्यवसाय को शुरू करें ओर उसे संचालित कर लाभ प्राप्त करें.


रिसर्च है जरूरी :-

शुरुआती बिजनेस को आगे चलकर बरकरार न रख पाने की एक सबसे बड़ी वजह रिसर्च की कमी देखी गई है। कई बार लोग जोश-जोश में आकर या किसी को देखकर जल्दबाजी में बिजनेस करना शुरू कर लेते हैं। ऐसे में उन्हें आगे चलकर कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए यदि आप बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने समय का बहुत बड़ा हिस्सा रिसर्च पर लगाएं। क्योंकि आपका रिसर्च ही बताएगा कि आप अपने प्रोडक्ट या सर्विस को कितने समय के लिए मार्केट में सक्रिय रख सकते हैं।


पैसे का सही इस्तेमाल :-

यह बात सौ फीसदी सच है कि बिना कैपिटल आप बिजनेस की कल्पना भी नहीं कर सकते। लेकिन दूसरी ओर सच्चाई यह भी है कि बिजनेस में ज्यादा से ज्यादा पैसे लगाना भी सफलता की गारंटी नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि आप अपने बिजनेस के नेचर को समझिए और जितना जरूरत हो उतना ही पैसा लगाइए। बिजनेस का स्वभाव हर पल बदलता रहता है। ऐसे में एक साथ इनवेस्ट करना समझदारी नहीं है। ऐसी परिस्थिति में आप किसी एक्सपर्ट की राय जरूर लें।


समय देना :-

अगर आप बिजनेस की शुरुआत करने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह तय है कि आपको अपने बिजनेस के लिए भरपूर समय देना होगा। क्योंकि शुरुआती दिनों में आपको कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा और इससे निपटने के लिए आपको भरपूर उर्जा भी लगानी पड़ेगी। इसके लिए आपके पास बेहतर टाइम मैनेजमेंट स्किल होना चाहिए, जो आपके बिजनेस के साथ-साथ आपकी सेहत के लिए एक अलार्म का काम करेगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि लोग अक्सर अपने काम में इतने बिजी हो जाते हैं कि अपने स्वास्थ्य पर भी ध्यान नहीं दे पाते।


टेक्नोलॉजी है अहम :-

आज के दौर को टेक्नोलॉजी का युग माना जाता है। इसलिए आज के समय में यदि आप सोच रहे हैं कि बिना तकनीक के इस्तेमाल से बिजनेस में सफल हो जाएंगे तो यह संभव नहीं है। देश में कई SME कंपनियां नवीनतम तकनीक को अपनाकर विकास की नई गाथा लिख रही हैं। अगर आप भी अपने छोटे बिजनेस की शुरुआत कर रहे हैं तो कुछ पैसा तकनीक के इस्तेमाल के लिए रखिए। क्योंकि तकनीक के इस्तेमाल से आप न केवल अपना समय बचा सकते हैं, बल्कि लागत कम करके लाभ भी कमा सकते हैं। कई कंपनियां तो ऐसी भी हैं, जो छोटे व्यपारियों को कंप्यूटर और दूसरे तकनीकी प्रोडक्ट कम दामों में देकर उनकी सहायता कर रही हैं।



अपना खुद का बिजनेस शुरू कैसे करें?

अपना खुद का बिजनेस चलाना एक स्ट्रेसफुल, लेकिन ये करियर की और लाइफ की एक अच्छी चॉइस हो सकता है। इसमें आपके टाइम और फोकस की जरूरत पड़ती है। इसके पूरी तरह से जमने से पहले अपने काम को जीना सीखें, ताकि आप इसे करने की आदत में आ जाएँ। बिजनेस को किस तरह से शुरू करना चाहिए, उसे लेकर काफी सारे अलग तरह के विचार मौजूद हैं। शुरुआत करने के लिए नीचे कुछ बेसिक आइडियाज दिए हुए हैं।



एक आइडिया के साथ चलना

1. एक आइडिया पाएँ: 

आप कुछ भी करना शुरू करें, उससे पहले आपको एक आइडिया की जरूरत पड़ेगी। एक क्लियर इमेज पाने के लिए आप कुछ मार्केट रिसर्च भी करके देख सकते हैं। ये कुछ ऐसा होना चाहिए, जिसे लेकर आप पैशनट हैं, क्योंकि आपका ये नया बिजनेस अब से आपका सारा टाइम और मनी लेने वाला है।


  • ऐसी चीजों के बारे में सोचकर एक ऐसा बिजनेस आइडिया पाएँ, जिनकी लोगों को जरूरत है और वो जिसके लिए पे भी करने को तैयार हैं, जो आपके एरिया में या ऑनलाइन नहीं मिलती है या जिसे आप और किसी से ज्यादा बेहतर तरीके से प्रोवाइड कर सकते हैं।


2. ये पॉसिबल है या नहीं, इसके बारे में भी सोचें:

एकदम से बहुत ज्यादा आगे बढ़ने से पहले, सोचकर देखें, कि आपका आइडिया कितना मुमकिन है। क्या ये कोई ऐसी चीज़ है, जिसके लिए लोग सच में पे करना चाहेंगे? क्या इससे आपको इतना प्रॉफ़िट मिल पाएगा, जिसके लिए आप आपका टाइम दे रहे हें? आपको इस बात को लेकर भी सुनिश्चित होना होगा, कि आप इसे आगे लेकर जाना चाहते हैं। वैसे तो एक ऐसा कंप्यूटर होना काफी अच्छा होगा, जो अचानक ही बस मेजिक करके आपके सामने फूड लाकर रख दे, जो कि पूरी तरह से नामुमकिन है।


3. सुनिश्चित कर लें, कि वो एकदम यूनिक है:

आपका आइडिया चाहे जो भी क्यों न हो, बस इसके मुमकिन होने की पुष्टि कर लें। ये आपको काम्पिटिशन को कम करने या खासतौर पर इसका सामना करने में आपकी मदद करेगा, जो आपके बिजनेस को ज्यादा सक्सेसफुल बना देगा। किसी मौजूदा प्रोडक्ट में जरा सा कुछ एक्स्ट्रा एड कर देना (ब्लू रेड वाइन या इसी तरह का कुछ करना) आपके बिजनेस को बढ़ाने के हिसाब से काफी नहीं होता है, तो इसलिए अपने दिमाग के घोड़ों को दौड़ाना शुरू कर दें!



एक बिजनेस प्लान बनाना

1. इस काम में लगने वाली लागत को तय कर लें:

आपको किसी भी इन्वेस्टर्स के सामने पेश करने लायक एक सॉलिड प्लान की जरूरत पड़ेगी और इसके ऊपर लगने वाली लागत को निर्धारित करना, इसकी शुरुआत करने की सबसे अच्छी जगह होती है। ये आपको एक आउटलाइन बनाकर देगा और ये तय करने में भी आपकी मदद करेगा कि आपको उस प्रोडक्ट को बनाने में या आपके द्वारा सोची हुई सर्विस को ऑफर करने के लिए कितने पैसों की जरूरत पड़ेगी। इसमें प्रोडक्शन कॉस्ट, शिपिंग्स, टैक्स, वर्कर्स की सैलरी, ऑफिस (काम करने की जगह) का रेंट, बगैरह शामिल है।


  • आपके बिजनेस में लगने वाली लागत, ये तय करने में बहुत बड़ी भूमिका अदा करेगा, कि आपको आपके बिजनेस से कोई प्रॉफ़िट मिलने भी वाला है या नहीं, क्योंकि आपको अपने बिजनेस को बनाए रखने के लिए, इससे भी ज्यादा कमाई करने की जरूरत पड़ेगी।



2. अपने पोटेन्शियल मार्केट के बारे में निर्धारित करें:

एकदम सच्चे रहें। असल में कितने लोग आपके बिजनेस का यूज करेंगे? वो आपकी सर्विसेज को यूज करने के लिए कितना पे करेंगे? अगर ये नंबर, आपके बिजनेस में बने रहने के कॉस्ट के कम्पेरिजन में काफी छोटे आते हैं, तो आपको एक बार फिर से इसके बारे में सोचना होगा या अपने प्लांस को ही बदलकर देखना चाहिए।



3. रुकावटों के बारे में भी सोचें:

आपको अपने बिजनेस को चलाते रहने के बीच में आने वाली सारी रुकावटों या परेशानियों का सामना करने के लिए, पहले से ही प्लान तैयार करके रखना चाहिए।


  • अपने काम्पिटिशन के बारे में भी सोचें; अगर उनके मार्केट शेयर या प्रोडक्ट ऑफरिंग बहुत स्ट्रॉंग और स्टेबल हैं, तो फिर आपको मार्केट में अपनी पकड़ बनाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। कोई भी इंसान एक ऐसे प्रोडक्ट को नहीं खरीदना चाहेगा, जिसका प्राइज किसी पहले से मौजूद प्रोडक्ट के ही बराबर हो या ये किसी अच्छे प्रोडक्ट या सर्विस का और महंगा वर्जन हो।


  • इसके साथ ही आपको उससे जुड़े हुए, खासतौर पर टैक्स से जुड़े हुए नियमों और क़ानूनों को भी जानना होगा। आपको आपकी लोकल स्टेट अथॉरटीज़ से और साथ ही आईआरएस (IRS) से पूछ लेना चाहिए।


  • किसी तरह की प्रोहिबिटिव कॉस्ट न होने की भी पुष्टि कर लें, जैसे कि ऐसा कोई इक्विपमेंट, जो आपके बिजनेस से प्रॉफ़िट मिलने के हिसाब से काफी महंगा हो। जैसे कि, कार्स को तब तक नहीं बनाया जाता, जब तक कि उन्हें अच्छे इक्विपमेंट्स का यूज करते हुए सस्ता बनाने की पुष्टि न हो जाए



एक मार्केट प्लान बनाना

1. एक बजट लिखकर रखें:

एक बार जब आपको आपके बिजनेस पर लगने वाली लागत का अंदाजा मिल जाए, फिर मार्केटिंग के लिए एक बजट लिखकर रख लें, जो ये दर्शाता हो, कि आपके पास में ऐड्वर्टाइज़िंग के ऊपर खर्च करने के लिए कितने पैसे मौजूद हैं।


2. अपने बजट पर फिट होने वाले आइडियाज तैयार करें:

एक बार जब आपको मालूम हो जाए, कि आपके पास में कितने पैसे हैं, फिर अलग-अलर तरह की मार्केटिंग पर लगने वाली कॉस्ट के ऊपर रिसर्च करें और फिर ऐसे आइडियाज को लेकर आएँ, जो उन मेथड्स पर फिट बैठते हों और आपकी प्राइज़ रेंज के हिसाब से इफेक्टिव हों। अगर आपके पास में मार्केटिंग पर खर्च करने के लायक काफी सारे पैसे हैं, तो आप एक कमर्शियल शूट करने के बारे में भी सोच सकते हैं। अगर आपको पास में ज्यादा कुछ न हो, तो तो फिर आप सोशल मीडिया को इफेक्टिव तरीके से यूज करने के तरीकों के बारे में सोच सकते हैं, जो सच में काफी इफेक्टिव होते हैं और जिनमें बहुत कम पैसों की लागत लगती है।



3. मार्केटिंग की टाइमिंग और लोकेशन को प्लान करें:

एक बार आप आपके हिसाब से मार्केटिंग करने के तरीके को चुन लें, फिर सोचकर देखें, कि ऐड्वर्टाइज़ करने के लिए सबसे इफेक्टिव प्लेसेस, दिन का कौन सा वक़्त, मंथ, या इयर सबसे अच्छी तरह से मदद करने वाला है।

  • आपको इस बात को लेकर भी सुनिश्चित होना होगा, कि आप मार्केटिंग के जिस भी टाइप का यूज कर रहे हैं, वो आपके द्वारा चाहे हुए लोगों के द्वारा आपके प्रोडक्ट या सर्विसेज पर, इन्टरेस्ट खींचकर लाने में निपुण है या नहीं। जैसे कि, अगर आप 55+ ओनली क्रूज लाइन की ऐड्वर्टाइज़ कर रहे हैं, तो सोशल मीडिया का यूज करना आपके लिए ठीक होगा। वहीं अगर आप आपके नए डांस क्लब की ऐड्वर्टाइजिंग करना चाहते हैं, तो फिर सिर्फ एक प्रिंटेड पेपर शायद आपकी ज्यादा मदद न कर पाए। इसके साथ ही गुजरात में जाकर किसी ऐसे बिजनेस के बारे में ऐड्वर्टाइजिंग करने का भी कोई पॉइंट नहीं निकलता है, जो सिर्फ और सिर्फ पुणे में ही मौजूद हो, इसलिए फिजिकल लोकेशन के बारे में भी सोचकर बढ़ें।


  • अगर आपकी सर्विसेज सीजनल हैं, तो फिर आपको ये भी तय करना होगा, कि सालभर का ऐसा कौन सा वक़्त है, जो इसकी ऐड्वर्टाइजिंग के लिए सही रहेगा। इसके साथ ही टेलीविज़न पर आने वाली ऐड्वर्टाइजिंग का टाइम भी ऐसा तय होना चाहिए, जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें।



फाइनेंस पाना

1. अपने बैंक से बात करें:

एक ऐसे बैंक से बात करें, जिसके साथ में आपके रिश्ते पहले से ही अच्छे हों। उनसे पूछकर देखें, कि वो किस तरह के बिजनेस स्टार्ट-अप लोन्स ऑफर करते हैं और वो आपके बिजनेस को किस तरह से फायदा दे सकते हैं। आपके द्वारा पहले से जाने हुए किसी बैंक का यूज करने पर, आपके बैंक का आपके फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स पर आसानी से एक्सेस होगा और उन्हें आप पर इन्वेस्ट करने में ज्यादा कोई तकलीफ भी नहीं होगी।


2. लोकल इन्वेस्टर्स पाएँ:

अगर बैंक का लोन आपके लिए पर्याप्त नहीं होगा, तो फिर किसी लोकल इन्वेस्टर्स की भी तलाश कर लें। ऐसे न जाने कितने ही बड़े बिजनेस टायकून या ऐसे ही कुछ अमीर लोग मिल जाएंगे, जो आपको सफल बनाने में अपनी ओर से मदद देने को तैयार हो सकते हैं। अपने एरिया में मौजूद ऐसे लोगों के ऊपर रिसर्च करें, जिनके पास में फंड हो और जो आपकी मदद करने के लिए तैयार हों।


3. वेंचर कैपिटलिस्ट्स या एंजल इन्वेस्टर्स की तलाश करें:

एंजल्स काफी हाइ नेट वर्थ के इंसान होते हैं और वेंचर कैपिटलिस्ट्स कंपनीज़ होती हैं। ये दोनों ही किसी स्टेक (पार्टनरशिप) के लिए हाइ रिस्क वेंचर फंड देते हैं और अक्सर ही एक्सपीरियन्स, मेनेजमेंट एक्स्पर्टीज़ और कांटैक्ट्स लाकर देते हैं। ये अक्सर ही नेटवर्क या एसोशिएशन के जरिए काम किया करते हैं।


4. फ्रेंड्स और रिलेटिव्स के पास जाएँ:

ऐसे लोग जो आपको काफी लंबे वक़्त से जानते हैं, ऐसा कहा जा सकता है, कि उन्हें आपकी एबिलिटी और इंटेंशन्स पर भी पूरा भरोसा हो सकता है। ये असल में ऐसे लोग होते हैं, जो अगर कभी भी शुरुआती दिनों में आप किसी मुश्किल हालत में फँस जाते हैं, तो ये पैसों के जरिए आपकी मदद करके, आपके साथ खड़े रहने को तैयार रहते हैं। हालांकि, इस बात को भी क्लियर कर दें, कि उनके पैसे एक रिस्क केपिटल में लगने वाले हैं और वो शायद उन्हें हमेशा के लिए भी खो सकते हैं या फिर कुछ ही वक़्त में उसे वापस भी पा सकते हैं।


5. क्राउड़-फंडिंग का यूज करें:

अगर आप अभी भी अपने बिजनेस के लिए भरपूर फंड नहीं जुटा पा रहे हैं, तो अब शुरुआत करने के लिए जरूरी पैसे इकट्ठे करने के लिए वेबसाइट का यूज करें। फंडिंग सोर्सेज के काफी सारे बेनिफिट्स हुआ करते हैं: आपको मिलने वाले पैसों के ऊपर आपको ब्याज नहीं देना होता है (जैसे कि ये वो पैसा है, जिसे असली प्रोडक्ट या सर्विस प्रोवाइड करने के लिए यूज किया जाता है) और ये न सिर्फ आपको ब्याज देने से बचाने में मदद करती है, साथ ही ये आपके कस्टमर बेस को बनाने में भी मदद करती है। आपके बिजनेस के पहले से ही सैकड़ों या हजारों कस्टमर्स होने वाले होंगे और वो दूसरे लोगों को भी आपके पास मौजूद प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में बताने को तैयार होंगे।


6. रिपोर्ट:

आप चाहे जिस भी सोर्स से फंड ले रहे हों, अपने फाइनेंशर्स को वक़्त-वक़्त पर, आमतौर पर साल में दो बार ऑपरेटिंग, स्ट्रेटजिक और अकाउंटिंग इन्फॉर्मेशन प्रोवाइड करते रहना न भूलें। अगर ऐसा हो सकता हो, कि सभी लोग खुद आ सकते हों, तो एक बोर्ड मीटिंग करना भी एक अच्छा आइडिया होगा। अगर सब नहीं आ पा रहे हैं, तो टेलीकॉन्फ्रेंस के जरिए इसे करें।



इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना

1. एक ऑफिस तलाश लें:

आपको अपना बिजनेस चलाने के लिए एक स्पेस की जरूरत होगी। अगर आपको जरा सी जगह की जरूरत है और आपके पास में कोई भी एम्प्लोयी नहीं है तो आप एक होम ऑफिस भी बना सकते हैं या फिर इसके लिए एक पूरी वर्कशॉप या वेयरहाउस की जरूरत भी पड़ सकती है। किसी फेंसी एड्रेस को यूज करने के बजाय एक कम कीमत वाली जगह या बिजनेस प्लेस का यूज करें। कुछ यूनिवर्सिटीज़ एक इनोवेटिव साइंटिफिक आइडिया के चलते, नए बिजनेस के लिए कम रेंट में स्पेस उपलब्ध करती हैं। ये पूरी तरह से आप क्या करने वाले हैं और आप आपके बिजनेस को कितना बड़ा करना चाहते हैं के ऊपर डिपेंड करता है। बस इस बात की पुष्टि कर लें, कि वो जगह आपके द्वारा किए जाने वाले काम के लिए कानूनी तौर पर ठीक है और आपके बजट में भी है।


2. इक्विपमेंट्स खरीद लें:

उन सारी चीजों को खरीद लें, काम शुरू करने के लिए जरूरी सारी चीजों को खरीद लें। ये कोई मेकिनिकल इक्विपमेंट, कम्प्यूटर्स, टेलीफोन या क्राफ्ट सप्लाइज, कुछ भी हो सकता है। ये पूरी तरह से इस बात पर डिपेंड करता है, कि आप क्या कर रहे हैं। बिजनेस सप्लाइ कंपनीज़ से खरीदने की कोशिश करें, जैसे कि ये आपको अच्छा-खासा डिस्काउंट दे सकते हैं। अगर आपके पास में कम पैसे हैं, तो फंड को आपके रास्ते की रुकावट न बनने देने के हिसाब से आपके लिए लीज या रेंट भी एक अच्छा ऑप्शन रहेगा।


3. एक रिकॉर्ड सिस्टम तैयार करें:

टैक्स का हिसाब करने से लेकर आपके द्वारा आपके कस्टमर रिकॉर्ड से कुछ पैसों की कमी देखने तक, ये जानने के लिए, कि मिस्टर शुक्ला ने अपना बिल पे किया भी है या नहीं, इस सब के लिए आपको आपके बिजनेस के सही ढ़ंग से बढ़ने के बारे में जानने के लिए, सारे रिकॉर्ड्स को तैयार रखना होगा। हर एक चीज़ को ढ़ंग से ऑर्गनाइज़ रखने के लिए फ़ाइल केबिनेट्स, लेबल्स और डिजिटल रिकॉर्ड्स सॉफ्टवेयर के ऊपर इन्वेस्ट करें।



एक कस्टमर बेस तैयार करना

1. मार्केटिंग और पीआर (PR) का यूज करें:

आपको कस्टमर्स के को कुछ इस तरह से अप्रोच करना होगा, ताकि वो आपके बिजनेस का यूज करने लग जाएँ। ये करना उस वक़्त और भी जरूरी हो जाता है, जब आपके पास में एक जमा हुआ, रेगुलर कस्टमर बेस न हो।


  • कुछ इस तरह से ऐड्वर्टाइज़ करें, ताकि आपके कस्टमर्स का सारा ध्यान आपके बिजनेस की ओर खिंचा चला आए और जहां तक हो सके, उनकी उम्मीदों को भी पूरा करने वाला लगे। क्रिएटिव बनें और अपने कस्टमर्स के हिसाब से जरूरी बातों को अपने बिजनेस में यूज करें।

  • कुछ सही लोगों को, आप जो भी कुछ करते हैं, उसके फ्री सैंपल्स बांटें, ताकि वो लोग आपके पास मौजूद चीज़ के बारे में अच्छी-अच्छी बातें बोल सकें। अच्छे शब्द (मतलब कि अच्छे पीआर) नए कस्टमर्स को अट्रेक्ट करने का सबसे अच्छा तरीका होता है। अगर आपको बैड रिव्यू मिलता है या नेगेटिव फीडबेक पाते हैं, तो पॉज़िटिव तरीके से रिस्पोंड करें और उस प्रॉब्लम को फिक्स कर दें। अगर आप गलतियों को सुधारने के लिए तैयार रहेंगे, तो लोग भी गलतियों की तरफ कम जजमेंटल होना शुरू कर देंगे।


2. ओल्ड फ़ैशन्ड नेटवर्किंग का यूज करें:

कान्फ्रेंस में जाएँ, चेरिटी ग्लास, कोम्प्लिमेंट्री बिजनेस के साथ मीटिंग्स करें और ऐसी हर उस जगह पर जाएँ, जहां पर ज़्यादातर कस्टमर्स के आने की उम्मीद हो। दूसरे शब्दों में कहें, तो: बाहर लोगों के बीच जाएँ और लोगों के साथ घुले-मिलें। अपने फ्रेंड्स कनेक्शन की मदद से ऐसे लोगों से मिलें, जो शायद आपकी मदद कर सकें। बिजनेस स्टार्ट करने के लिए इस तरह के इन्टरैक्शन काफी जरूरी होते हैं। वैसे भी किसी दीवार के अंदर आप कब तक छिपकर रह सकते हैं।


3. अच्छी कस्टमर सर्विस स्किल्स अपनाएं:

लोगों के साथ अच्छी तरह से इन्टरैक्ट करें। लोग जो कुछ कहना चाहते हैं, उसे समझे की कोशिश करें। उनकी ऐसी जरूरतों के बारे में बताना सीखें, जिसे उनके पास होने के बैड भी वो समझ नहीं पा रहे हैं। लोगों को खुश करने के तरीके सीखें। चार्मिंग बनें। और सबसे जरूरी, हम्बल होना सीखें। हो सकता है, कि कस्टमर शायद हमेशा सही न हो, लेकिन आपको उन्हें ऐसा महसूस कराते आना चाहिए, कि वो सही हैं।


4. एक वेबसाइट बनाएँ:

सारी दुनिया अब ऑनलाइन आ गई है। ऐसा कोई भी बिजनेस, जो आने वाले 10 सालों तक सर्वाइव करना चाहता है, उसे अपनी वेबसाइट बनाना ही होगी। लोग आप से कांटैक्ट करने के लिए, आपकी लोकेशन को पाने के लिए, आपके काम करने के वक़्त को जानने के लिए, आप से सवाल करने के लिए, कुछ सलाह देने के लिए और शायद आपकी सर्विस या प्रोडक्ट्स को खरीदने के भी इसे यूज करेंगे। अगर आपकी कोई ऐसी वेबसाइट और सर्विस है, जो इन्टरनेट के ऊपर मौजूद है, तो आप आपके सर्विस एरिया को सिर्फ अपने एरिया से आगे और यहाँ तक कि दुनियाभर में भी फैला सकेंगे।



पेमेंट लेना

1. पेमेंट की मांग रखें:

लोगों को आपका फायदा न उठाने दें। एक खास विंडो ऑफ टाइम (आपके काम के हिसाब से जो ठीक लगे) के लिए पेमेंट की मांग रखें। जितना जल्दी हो सके, उतना जल्दी लोगों को इनवॉइस दें। अगर कोई इंसान पेमेंट देने में लेट हो जाता है, तो उन से बात करें। अगर आप इन प्रॉब्लम्स को, इनके ठीक होने की आश में इग्नोर करते जाएंगे, तो आप खुद को फ्री में बिजनेस करता हुआ पाएंगे और आपका सारा बिजनेस चौपट हो जाएगा।

2. क्रेडिट कार्ड्स लें:

आजकल बहुत कम ही लोग प्रोडक्ट या सर्विस के लिए कैश में पे किया करते हैं। अगर आप क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स एक्सेप्ट करते हैं, तो ये आपके बिजनेस के लिए ज्यादा आसान रहेगा, साथ ही अकाउंटिंग का रिकॉर्ड रखने में भी मदद करेगा। अगर आप खुद को अजीब तरह से फीस लेने से सेफ रखा चाहते हैं या आपके बिजनेस को और भी बढ़ाना चाहते हैं, तो स्क्वेर (Square) का यूज करने के बारे में सोचें। ये डिवाइस स्मार्टफोन्स में या टैबलेट में प्लग किया जाता है और ये आपको कस्टमर के कार्ड को स्वाइप करने देता है।


3. एक ऑनलाइन सिस्टम सेट अप करें:

अगर आप आपके प्रोडक्ट को ऑनलाइन सेल करने का प्लान कर रहे हैं, तो आपको एक ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम सेटअप करना होगा। पेपल (PayPal) जैसी सर्विसेज इसे काफी आसान बना सेती हैं। आपके लिए कौन सी मेथड ठीक रहेगी, के ऊपर रिसर्च करें। हालांकि, आपको आपके द्वारा यूज किए जाने वाले सिस्टम के सिक्योर होने की भी पुष्टि करना है। आपको आपकी किसी भी इन्फॉर्मेशन या आपके कस्टमर्स की इन्फॉर्मेशन को हैक नहीं होने देना है, न ही इसका किसी को गलत फायदा उठाने देना है।



एक व्यवसाय को शुरू करने के फायदे (Benefits)

एक बिज़नस को स्टार्ट करना एक प्रेरणादायी युक्ति हैं, विशेष रूप से जब कोई यह पहली बार करता है. या जो अपने 8 से 9 घंटे के ऑफिस काम से आजादी चाहते हैं, यह उन्हें प्रोत्साहित भी करता हैं. इसमें वे अपने अनुसार कभी भी अपना व्यापार कर सकते हैं. इसमें उनका कोई बॉस नहीं होता, जिसे उन्हें हर रोज रिपोर्ट करना पड़े. साथ ही इसमें उन्हें प्रॉफिट कितना भी मिल सकता हैं, इसकी कोई निश्चित सीमा भी नहीं होती हैं.   



खुद का बिज़नेस शुरू करने से पहले सलाह

  • अपने प्रोडक्ट/सर्विस के न सिर्फ आपकी कम्यूनिटी में, बल्कि सभी पब्लिक एरिया में अपीलिंग होने की पुष्टि कर लें, और अगर आप इसे अपीलिंग नहीं बना सकते हैं? तो सेंसिबल हो जाएँ।

  • आपकी पहचान में मौजूद ऐसे लोगों से बात करें, जो एक होम बेस्ड बिजनेस रन करते हैं। वो आपको बिजनेस की शुरुआत करने में मदद कर सकेंगे।

  • इस बात को समझ लें, कि बिजनेस को सही स्पीड में लाने में आपको वक़्त लग सकता है। ज़्यादातर बिजनेस में एकदम शुरुआत से ही प्रॉफ़िट नहीं मिलने लग जाता है और न ही आपको ऐसा होने की उम्मीद लगाना चाहिए। आपको अपना खुद का बॉस बनने के लिए काफी सारे सैक्रफाइसेस करने (नुकसान झेलना) होंगे।

  • जब आप आपके बिजनेस के लिए वर्कर्स को हायर कर रहे हों, तब वर्कर्स का काफी गहराई से रिव्यू करने और इंटरव्यू लेने की पुष्टि जरूर कर लें। आपके पास में उनकी असली इन्फॉर्मेशन, पासपोर्ट्स, आईडी, पिछले काम, लाइसेन्स और ऐसी ही और भी दूसरी चीजों की इन्फॉर्मेशन रख लें, जिनके ऊपर वो सच में डिपेंडेंट हैं।

  • पेमेंट को आसान और लोगों के द्वारा अफोर्ड करने लायक बनाएँ। क्रेडिट कार्ड्स एक्सेप्ट करें, मंथली पेमेंट प्लान्स ऑफर करें, बाय वन गेट वन फ्री ऑफर करके या सेल प्राइज़ देकर प्रोडक्ट्स को प्रमोट करें।

  • जब आप एक नाम, स्लोगन, सर्विसेज बगैरह के बारे में फैसला ले रहे हों, तब दूसरों लोगों से इनके बारे में उनकी राय मांगकर देखें।

  • अपने पेरेंट्स से मदद की मांग करें।

  • अपने फ्रेंड्स, रिलेटिव्स और कलीग्स से पूछें और अपने शुभचिंतकों (वेलविशर्स) और सपोर्टर्स की मदद से कुछ अच्छा प्लान करें।

  • एकदम ओरिजिनल आइडिया के साथ आएँ। अगर आप कुछ सॉफ्टवेयर से जुड़ा कर रहे हैं, तो ऐसे में सिम्प्लिसिटी, ओरिजिनेलिटी और फंक्शन ही इसकी असली पहचान होती है। आपको उन सारे फीचर्स को पाना होगा, जो एक नॉर्मल सॉफ्टवेयर में हुआ करते हैं, साथ ही यूजर्स की सहूलियत के हिसाब से और भी चीजों को ध्यान में रखना होगा।

  • आपके नए एम्प्लोयी के इस नए जॉब के साथ कम्फ़र्टेबल होने की पुष्टि करने के लिए, उन्हें ट्रेनिंग देना न भूलें।




FAQ

(People also ask)

Q : सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाला बिजनेस कौन सा है ? List of High Profit Business in India

Ans :- ज्यादा कमाई वाले बिजनेस आइडिया रेस्टोरेंट्स का बिजनेस कैटरिंग बिज़नेस रेडीमेड नमकीन और नाश्ते की दुकान खेल और मनोरंजन पार्लर चाय की दुकान


Q : भारत में सबसे अच्छा बिजनेस कौन सा है?

इंडिया में सबसे अच्छा बिजनेस कौन सा है?

Ans :-

  • रेस्टोरेंट्स बिजनेस

  • कपड़े का बिजनेस

  • कोचिंग

  • यूट्यूब

  • कैटरिंग बिजनेस

  • डिजिटल मार्केटिंग

  • नेटवर्क मार्केटिंग

  • मशरूम फार्मिंग बिजनेस


Q : बिजनेस क्यों करना चाहते हैं?

Ans :- जिस तरह से जीने के लिए खाना ज़रूरी है, वैसे ही खाने को ख़रीदने और पैसों का इंतज़ाम करने के लिए बिज़नेस करना ज़रूरी है। जीवन की कई ऐसी ज़रूरतें हैं, जिन्हें बिना पैसों के पूरा नहीं किया जा सकता है। मान लीजिए आप एक किसान है, तो आप खेती करके अपने जीवन की ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं।


Q : बिजनेस की शुरुआत कैसे होती है?

Ans :- कैसे अपना खुद का बिजनेस शुरू करें

  1. एक आइडिया के साथ चलना

  2. एक बिजनेस प्लान बनाना

  3. एक मार्केट प्लान बनाना

  4. फाइनेंस पाना

  5. इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना

  6. एक कस्टमर बेस तैयार करना

  7. पेमेंट लेना


Q : सबसे ज्यादा कमाई वाला व्यवसाय कौन सा है ?

Ans :-  सबसे ज्यादा प्रॉफिट मार्जिन वाला व्यवसाय कैटरिंग का व्यवसाय है.


Q : सबसे सफल बिजनेस कौन सा है?

Ans :- भारत में करने के लिए सबसे सफल स्मॉल बिज़नेस आइडिया

  • ब्रेकफास्ट ज्वाइंट (Breakfast)

  • चाय का व्यापार (Tea Business)

  • वीडियोग्राफी का व्यवसाय (Video Graphy Business)

  • शादी के योजनाकार (Wedding Planner)

  • इलेक्ट्रॉनिक की दुकान (Electronic Shop Business)

  • किराने की दुकान (Grocery Store)

  • डी जे का व्यवसाय (DJ Service Business)


Q : बिना पैसों के साथ में अपना खुद का व्यवसाय कैसे शुरू कर सकते हैं ?

Ans :- बिना पैसों के साथ आप अपना खुद का व्यवसाय करने का सोच रहे हैं तो आपको पहले खुद से यह पूछना होगा कि आप मुफ्त में क्या कर सकते हैं, इसके अलावा आपको कम से कम 6 महीने की बचत करनी होगी. आप अपने दोस्तों या परिवार से अतिरिक्त फण्ड उधार में ले सकते हैं. या फिर आप एक छोटे व्यवसाय लोन के लिए आवेदन भी दे सकते हैं.


Q : पैसे कमाने के लिए कौन सा व्यवसाय सबसे अच्छा है ?

Ans :- पैसे कमाने के लिए सभी व्यवसाय अच्छे होते हैं आप किसी भी प्रकार का व्यवसाय कर सकते हैं यह पूरी तरह से आपके ऊपर होता हैं कि आपको किस तरह का व्यवसाय करना है.


Q : अपने व्यवसाय से जल्दी पैसे कैसे कमा सकते हैं ?

Ans :- अपने व्यवसाय को शुरू कर जल्दी पैसे कमाने के बारे में सोच रहे हैं तो पहले आप अपने व्यवसाय को बढ़ावा दें. इसकी मार्केटिंग ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों जगह करें. आप इसकी एक वेबसाइट भी बना सकते हैं. जितने ज्यादा लोगों को आपके व्यवसाय के बारे में पता होगा उतने ही जल्दी आप पैसे कमा पाएंगे.


Q : भारत में व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन कैसे मिल सकता है ?

Ans :- भारत सरकार द्वारा व्यवसायियों के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना बनाई गई हैं जिसके माध्यम से आप अपने व्यवसाय के लिए बैंक से लोन ले सकते हैं.


Q : क्या छोटे व्यवसाय के लिए भी रजिस्ट्रेशन करना आवश्यक होता हैं ?

Ans :- जी हां, व्यवसाय छोटा हो या बड़ा आपको उसका कानूनी रूप से रजिस्ट्रेशन कराना आवश्यक होता हैं क्योकि इससे यह साबित होता हैं कि आप कोई गैरकानूनी काम नहीं कर रहे हैं.

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